अब आप शाहीन बाग जाएंगे तो दिखाना होगा पहचान पत्र, वालेंटियर्स को सता रहा है ये डर!
सार
- जामिया और शाहीनबाग में गोलीबारी घटना के बाद बदला परिदृश्य
- दक्षिण-पूर्व दिल्ली के डीसीपी चिन्मय बिस्वाल की एडिशनल डीसीपी कुमार ज्ञानेश को मिली जिम्मेदारी
- शाहीन बाग में भी प्रदर्शन को लेकर, जारी रखने को लेकर हलचल
विस्तार
सोमवार की सुबह कुछ धूप लेकर आई। शाहीनबाग, जसोला मेट्रो स्टेशन से प्रदर्शन स्थल की तरफ बढ़ते ही माहौल पिछले सप्ताह से कुछ अलग दिखाई दिया। प्रदर्शन स्थल पर वालेंटियर्स के चार-पांच के समूह में दो तीन समूह चर्चा करते मिले। वालेंटियर्स में सीएए, एनपीआर, एनआरसी के विरोध को लेकर चल रहे प्रदर्शन पर कई तरह के विचार मिले।
प्रदर्शन का दिल्ली चुनाव पर पड़ने वाला असर भी चर्चा में रहा। केंद्र सरकार के किसी मंत्री के शाहीन बाग न आने की चर्चा से लेकर गोली चलाने की घटनाओं पर वालेंटियर्स की चिंता ने चर्चाओं के बाजार को गर्म कर रखा है। अब खबर आई है कि शाहीन बाग जाने की मंशा रखने वालों को पहचान पत्र देखने के बाद ही जाने दिया जा रहा है।
पुलिस ने सुरक्षा को लेकर इंतजाम बढ़ाया है। चुनाव आयोग के प्रवक्ता के अनुसार आयोग के अधिकारियों ने गोली चलने की घटनाओं को संज्ञान में लेकर शाहीन बाग का रुख किया था। उन्होंने वहां सुरक्षा के इंतजाम अपर्याप्त पाए। इसके बाद फैसला लेते हुए दक्षिण-पूर्व के डीसीपी चिन्मय बिस्वाल को गृह मंत्रालय रिपोर्ट करने के लिए कहा और तत्काल प्रभाव से एडिशनल डीसीपी कुमार ज्ञानेश को दायित्व संभालने के लिए कहा गया।
इतना ही नहीं नियमित डीसीपी की तैनाती के लिए आयोग ने पुलिस कमिश्नर और गृह मंत्रालय से तीन नाम भी मांगे हैं। इस बीच शाहीन बाग के वालेंटियर्स का कहना है कि दिल्ली पुलिस की तरफ से सुरक्षा बढ़ने के संकेत हैं और शाहीन बाग आने वालों के पहचान पत्र देखे जा रहे हैं।
इतना ही नहीं नियमित डीसीपी की तैनाती के लिए आयोग ने पुलिस कमिश्नर और गृह मंत्रालय से तीन नाम भी मांगे हैं। इस बीच शाहीन बाग के वालेंटियर्स का कहना है कि दिल्ली पुलिस की तरफ से सुरक्षा बढ़ने के संकेत हैं और शाहीन बाग आने वालों के पहचान पत्र देखे जा रहे हैं।
मुख्य मार्ग से हटें लोग
दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक की इच्छा है कि मुख्य मार्ग को प्रदर्शनकारी खाली कर दें। वहां से हट जाएं। पुलिस कमिश्नर से शाहीन बाग पर संभवत: पहली बार कुछ कहा है। अमूल्य पटनायक ने आगे भी कहा कि जो लड़का शाहीन बाग में गोली चलाने आया था, वह उससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता था।
उसमें कुछ और करने की हिम्मत नहीं थी। एक दो और घटी घटनाओं को उन्होंने अलग बताया है। हालांकि अमूल्य पटनायक शाहीन बाग प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था से संतुष्ट हैं।
उसमें कुछ और करने की हिम्मत नहीं थी। एक दो और घटी घटनाओं को उन्होंने अलग बताया है। हालांकि अमूल्य पटनायक शाहीन बाग प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था से संतुष्ट हैं।
प्रदर्शन खत्म कराने का जन दबाव
न्यू फ्रेंड्स कालोनी, जामिया से लेकर शाहीन बाग तक आपको पुलिस जगह-जगह मिलेगी। किसी भी पुलिस के जवान या अधिकारी को विश्वास में लेकर बात करें तो उनका कहना है कि प्रदर्शन को लेकर आस-पास के लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है। हालांकि वह गोलीबारी जैसी घटना के पीछे राजनीतिक कारण या फिर मनचले किस्म के लड़कों को अधिक जिम्मेदार मान रहे हैं।
उनका कहना है कि देश में हिन्दू-मुसलमान या भारत -पाकिस्तान या फिर नफरत जैसा माहौल बढ़ने पर समाज में इस तरह के लड़के अपराध कर बैठते हैं। पुलिस के एक रिटायर होने के करीब पहुंचे हेड कांस्टेबल का कहना है कि कई तो लोगों के उकसावे या मोबाइल फोन (सोशल मीडिया) पर प्रसिद्धि पाने के लिए कदम उठाते हैं और जेल पहुंच जाते हैं।
उनका कहना है कि देश में हिन्दू-मुसलमान या भारत -पाकिस्तान या फिर नफरत जैसा माहौल बढ़ने पर समाज में इस तरह के लड़के अपराध कर बैठते हैं। पुलिस के एक रिटायर होने के करीब पहुंचे हेड कांस्टेबल का कहना है कि कई तो लोगों के उकसावे या मोबाइल फोन (सोशल मीडिया) पर प्रसिद्धि पाने के लिए कदम उठाते हैं और जेल पहुंच जाते हैं।
प्रदर्शन पर पुलिस के जवान बताते हैं कि लगातार लोगों की शिकायतें आ रही हैं। शाहीनबाग की यह सड़क हमेशा अच्छे ट्रैफिक वाली है। सुबह लगातार स्कूल बसें, आफिस जाने वालों का रेला लगा रहता है। अब सबको परेशानी हो रही है। सड़क पर तमाम दुकानें हैं। 15 अगस्त के बाद से बंद पड़ी हैं। जिनकी दुकानें हैं, उनका रोजगार ठप है। बड़े अच्छे-अच्छे शोरूम हैं। इससे कारोबारी परेशान हैं। पुलिस जवानों का कहना है कि प्रदर्शन पर बैठने वाली महिलाओं, इसके पीछे के लोगों को समझना चाहिए।
सीएए पर प्रदर्शन क्यों?
एक बड़ा सवाल कि शाहीन बाग के लोग सीएए का विरोध क्यों कर रहे हैं? इससे नागरिकता को क्या खतरा? एनआरसी तो पता नहीं कब आएगा? वालेंटियर्स का कहना है कि यह एनआरसी न लाने के लिए जनदबाव है। एनपीआर में अनावश्यक जानकारी न मांगने का जनदबाव है।
वालेंटियर्स का कहना है कि केंद्रीय गृहमंत्री ने संसद को भरोसा दिया है कि वे एनआरसी लाएंगे। राष्ट्रपति ने भी अपने भाषण में कहा है। यह बात अलग है कि प्रधानमंत्री ने दिल्ली में रामलीला मैदान से थोड़ा हटकर कहा है, लेकिन संसद में गृहमंत्री और फिर राष्ट्रपति के वक्तव्य को झूठा मान लिया जाए?
वालेंटियर्स का कहना है कि केंद्रीय गृहमंत्री ने संसद को भरोसा दिया है कि वे एनआरसी लाएंगे। राष्ट्रपति ने भी अपने भाषण में कहा है। यह बात अलग है कि प्रधानमंत्री ने दिल्ली में रामलीला मैदान से थोड़ा हटकर कहा है, लेकिन संसद में गृहमंत्री और फिर राष्ट्रपति के वक्तव्य को झूठा मान लिया जाए?
वालेंटियर्स का दर्द, थकान, पीड़ा और जिद
अब वालेंटियर्स की तरफ आइए। जामिया मिलिया इस्लामिया के एक छात्र का कहना है कि वह सब लोग जिन्हें परेशानी हो रही है, उनका दर्द समझते हैं। सूत्र का कहना है कि बहुत से लोगों को परेशानी, कारोबार में नुकसान हो रहा है, प्रदर्शन कर रहे लोगों के अस्तित्व पर भी बन आई है। एक अन्य वालेंटियर का कहना है कि हमारी नुकसान होने वाले लोगों के साथ सहानुभूति है।
एक 45 साल की महिला का कहना है कि कौन यहां प्रदर्शन या धरना पर बैठना चाहता है। अपने पोते के साथ प्रदर्शन स्थल पर मिली महिला का कहना है कि केंद्र सरकार ही उन्हें प्रदर्शन पर बैठने के लिए मजबूर कर रही है। महिला का कहना है कि केंद्र सरकार हमारे बीच में क्यों नहीं आई? तीन तलाक पर तो मंत्री संसद में बड़ी-बड़ी बात कर रहे थे।
अब क्यों नहीं आकर हमारे बीच में बात करते। एक अन्य 18-28 साल की युवती कहती है कि अमित शाह देश के गृहमंत्री हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। दोनों हमारे और देश के नेता हैं। वह इस तरह से शाहीन बाग का नाम लेते हैं, जैसे हम सब भारत में नहीं रहते, भारतीय नहीं हैं और राष्ट्रीय नहीं है।
एक 45 साल की महिला का कहना है कि कौन यहां प्रदर्शन या धरना पर बैठना चाहता है। अपने पोते के साथ प्रदर्शन स्थल पर मिली महिला का कहना है कि केंद्र सरकार ही उन्हें प्रदर्शन पर बैठने के लिए मजबूर कर रही है। महिला का कहना है कि केंद्र सरकार हमारे बीच में क्यों नहीं आई? तीन तलाक पर तो मंत्री संसद में बड़ी-बड़ी बात कर रहे थे।
अब क्यों नहीं आकर हमारे बीच में बात करते। एक अन्य 18-28 साल की युवती कहती है कि अमित शाह देश के गृहमंत्री हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। दोनों हमारे और देश के नेता हैं। वह इस तरह से शाहीन बाग का नाम लेते हैं, जैसे हम सब भारत में नहीं रहते, भारतीय नहीं हैं और राष्ट्रीय नहीं है।
कुछ अन्य वालेंटियर्स का कहना है कि भाजपा ने इसे जानबूझकर राजनीतिक मुद्दा बना दिया। वह चाहती है कि हिंदू वोट इस पर एक हो जाए। एक अन्य वालेंटियर्स का कहना है कि कुछ और राजनीतिक दलों के लोग भी उनके मंच पर आए और इसे राजनीतिक बना दिया।
सूत्र का कहना है कि चूंकि यह ऑर्गेनाइज्ड मंच नहीं है, इसलिए वह मानते हैं कि कुछ गलतियां हो गई हैं। मेरठ से आए एक सदस्य ने बताया कि जो तीन- चार गोलीबारी की घटनाएं हुई हैं, वह प्रदर्शन हटाने के लिए जनदबाव बनाने के इरादे से हुई हैं।
सूत्र का कहना है कि चूंकि यह ऑर्गेनाइज्ड मंच नहीं है, इसलिए वह मानते हैं कि कुछ गलतियां हो गई हैं। मेरठ से आए एक सदस्य ने बताया कि जो तीन- चार गोलीबारी की घटनाएं हुई हैं, वह प्रदर्शन हटाने के लिए जनदबाव बनाने के इरादे से हुई हैं।
क्या हो सकता है?
वालेंटियर्स को लग रहा है कि गोलीबारी की कुछ घटनाओं के बाद शाहीन बाग की तरफ लोगों का हूजूम भेजा जा सकता है। यह किसी राजनीतिक दल की भी कोशिश हो सकती है। बताते हैं रविवार को भी बड़ी संख्या में लोग आकर नारेबाजी कर रहे थे।
वालेंटियर्स का कहना है कि इसमें जिन लोगों को परेशानी हो रही हैं, वह भी हो सकते हैं। लेकिन इसी तरह की स्थिति का फायदा उठाकर कभी भी प्रदर्शन स्थल को जबरदस्ती खाली कराया जा सकता है। एक अन्य वालेंटियर का कहना है कि पांच या छह फरवरी को भी ऐसा हो सकता है।
वालेंटियर्स का कहना है कि इसमें जिन लोगों को परेशानी हो रही हैं, वह भी हो सकते हैं। लेकिन इसी तरह की स्थिति का फायदा उठाकर कभी भी प्रदर्शन स्थल को जबरदस्ती खाली कराया जा सकता है। एक अन्य वालेंटियर का कहना है कि पांच या छह फरवरी को भी ऐसा हो सकता है।